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शल्य पर्व
अध्याय ३४
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वैशम्पाय़न उवाच
ततो मन्युपरीतात्मा जगाम यदुनन्दनः |  १२   क
तीर्थय़ात्रां हलधरः सरस्वत्यां महाय़शाः |  १२   ख
मैत्रे नक्षत्रय़ोगे स्म सहितः सर्वय़ादवैः ||  १२   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति