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शल्य पर्व
अध्याय ३४
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वैशम्पाय़न उवाच
सुवर्णं रजतं चैव धेनूर्वासांसि वाजिनः |  १६   क
कुञ्जरांश्च रथांश्चैव खरोष्ट्रं वाहनानि च |  १६   ख
क्षिप्रमानीय़तां सर्वं तीर्थहेतोः परिच्छदम् ||  १६   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति