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शल्य पर्व
अध्याय ३४
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वैशम्पाय़न उवाच
वासांसि च महार्हाणि पर्यङ्कास्तरणानि च |  २३   क
पूजार्थं तत्र कॢप्तानि विप्राणां सुखमिच्छताम् ||  २३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति