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शल्य पर्व
अध्याय ३४
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वैशम्पाय़न उवाच
ततो महात्मा निय़मे स्थितात्मा; पुण्येषु तीर्थेषु वसूनि राजन् |  २९   क
ददौ द्विजेभ्यः क्रतुदक्षिणाश्च; यदुप्रवीरो हलभृत्प्रतीतः ||  २९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति