शल्य पर्व  अध्याय ३४

वैशम्पाय़न उवाच

तच्छ्रुत्वा भगवान्क्रुद्धो यक्ष्माणं पृथिवीपते |  ५५   क
ससर्ज रोषात्सोमाय़ स चोडुपतिमाविशत् ||  ५५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति