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शल्य पर्व
अध्याय ३४
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वैशम्पाय़न उवाच
ओषधीनां क्षय़े जाते प्राणिनामपि सङ्क्षय़ः |  ५९   क
कृशाश्चासन्प्रजाः सर्वाः क्षीय़माणे निशाकरे ||  ५९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति