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शल्य पर्व
अध्याय ३४
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वैशम्पाय़न उवाच
ततो देवाः समागम्य सोममूचुर्महीपते |  ६०   क
किमिदं भवतो रूपमीदृशं न प्रकाशते ||  ६०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति