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शल्य पर्व
अध्याय ३४
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वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तदा चिन्त्य प्राह वाक्यं प्रजापतिः |  ६६   क
नैतच्छक्यं मम वचो व्यावर्तय़ितुमन्यथा |  ६६   ख
हेतुना तु महाभागा निवर्तिष्यति केनचित् ||  ६६   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति