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शान्ति पर्व
अध्याय ३३०
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श्रीभगवानु उवाच
साञ्जलिप्रग्रहो भूत्वा चतुर्वक्त्रो निरुक्तगः |  ५६   क
उवाच वचनं रुद्रं लोकानामस्तु वै शिवम् |  ५६   ख
न्यस्याय़ुधानि विश्वेश जगतो हितकाम्यया ||  ५६   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति