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शान्ति पर्व
अध्याय ३४२
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व्राह्मण उवाच
अस्मिन्हि लोकसन्ताने परं पारमभीप्सतः |  ५   क
उत्पन्ना मे मतिरिय़ं कुतो धर्ममय़ः प्लवः ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति