वन पर्व  अध्याय १६४

अर्जुन उवाच

स मामुवाच राजेन्द्र प्रीय़माणो द्विजोत्तमः |  ४   क
दृष्टस्त्वय़ा महादेवो यथा नान्येन केनचित् ||  ४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति