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शान्ति पर्व
अध्याय ३४५
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भीष्म उवाच
स वनानि विचित्राणि तीर्थानि च सरांसि च |  १   क
अभिगच्छन्क्रमेण स्म कञ्चिन्मुनिमुपस्थितः ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति