वन पर्व  अध्याय ४०

अर्जुन उवाच

कपर्दिन्सर्वभूतेश भगनेत्रनिपातन |  ५७   क
व्यतिक्रमं मे भगवन्क्षन्तुमर्हसि शङ्कर ||  ५७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति