आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ३५

अर्जुन उवाच

व्रह्म यत्परमं वेद्यं तन्मे व्याख्यातुमर्हसि |  १   क
भवतो हि प्रसादेन सूक्ष्मे मे रमते मतिः ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति