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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३५
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वैशम्पाय़न उवाच
विदितं चापि मे राजन्विदुरस्य महात्मनः |  ११   क
गमनं विधिना येन धर्मस्य सुमहात्मनः ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति