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मौसल पर्व
अध्याय ५
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वैशम्पाय़न उवाच
ते वै देवाः प्रत्यनन्दन्त राज; न्मुनिश्रेष्ठा वाग्भिरानर्चुरीशम् |  २५   क
गन्धर्वाश्चाप्युपतस्थुः स्तुवन्तः; प्रीत्या चैनं पुरुहूतोऽभ्यनन्दत् ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति