आश्रमवासिक पर्व  अध्याय ३५

वैशम्पाय़न उवाच

धृतराष्ट्र महावाहो कच्चित्ते वर्धते तपः |  २   क
कच्चिन्मनस्ते प्रीणाति वनवासे नराधिप ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति