आश्रमवासिक पर्व  अध्याय ३५

वैशम्पाय़न उवाच

सर्वगश्चैव कौरव्य सर्वं व्याप्य चराचरम् |  २०   क
दृश्यते देवदेवः स सिद्धैर्निर्दग्धकिल्विषैः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति