सभा पर्व  अध्याय ६

वैशम्पाय़न उवाच

ईदृशी भवता काचिद्दृष्टपूर्वा सभा क्वचित् |  ८   क
इतो वा श्रेय़सी व्रह्मंस्तन्ममाचक्ष्व पृच्छतः ||  ८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति