विराट पर्व  अध्याय ३५

वैशम्पाय़न उवाच

अथोत्तरा च कन्याश्च सख्यस्तामव्रुवंस्तदा |  २२   क
वृहन्नडे आनय़ेथा वासांसि रुचिराणि नः ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति