विराट पर्व  अध्याय ३५

वैशम्पाय़न उवाच

अथैतद्वचनं मेऽद्य निय़ुक्ता न करिष्यसि |  ७   क
प्रणय़ादुच्यमाना त्वं परित्यक्ष्यामि जीवितम् ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति