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उद्योग पर्व
अध्याय ३५
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विदुर उवाच
पुण्यं प्रज्ञां वर्धय़ति क्रिय़माणं पुनः पुनः |  ५३   क
वृद्धप्रज्ञः पुण्यमेव नित्यमारभते नरः ||  ५३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति