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उद्योग पर्व
अध्याय ७०
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वैशम्पाय़न उवाच
यथा हि सर्वास्वापत्सु पासि वृष्णीनरिन्दम |  ४   क
तथा ते पाण्डवा रक्ष्याः पाह्यस्मान्महतो भय़ात् ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति