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द्रोण पर्व
अध्याय २६
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सञ्जय़ उवाच
यथा प्राग्ज्योतिषो राजा गजेन मधुसूदन |  ३   क
त्वरमाणोऽभ्यतिक्रान्तो ध्रुवं तस्यैष निस्वनः ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति