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शल्य पर्व
अध्याय ३५
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वैशम्पाय़न उवाच
तस्मान्नदीगतं चापि उदपानं यशस्विनः |  १   क
त्रितस्य च महाराज जगामाथ हलाय़ुधः ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति