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शल्य पर्व
अध्याय ३५
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वैशम्पाय़न उवाच
तेषां तु कर्मणा राजंस्तथैवाध्ययनेन च |  १२   क
त्रितः स श्रेष्ठतां प्राप यथैवास्य पिता तथा ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति