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शल्य पर्व
अध्याय ३५
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वैशम्पाय़न उवाच
सोमं पास्यामहे हृष्टाः प्राप्य यज्ञं महाफलम् |  १६   क
चक्रुश्चैव महाराज भ्रातरस्त्रय़ एव ह ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति