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शल्य पर्व
अध्याय ३५
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वैशम्पाय़न उवाच
तथा तु ते परिक्रम्य याज्यान्सर्वान्पशून्प्रति |  १७   क
याजय़ित्वा ततो याज्याँल्लव्ध्वा च सुवहून्पशून् ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति