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शल्य पर्व
अध्याय ३५
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वैशम्पाय़न उवाच
याज्येन कर्मणा तेन प्रतिगृह्य विधानतः |  १८   क
प्राचीं दिशं महात्मान आजग्मुस्ते महर्षय़ः ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति