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शल्य पर्व
अध्याय ३५
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वैशम्पाय़न उवाच
स एवमनुसञ्चिन्त्य तस्मिन्कूपे महातपाः |  ३१   क
ददर्श वीरुधं तत्र लम्वमानां यदृच्छय़ा ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति