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शल्य पर्व
अध्याय ३५
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वैशम्पाय़न उवाच
तत्र चैनं समुत्सृज्य भ्रातरौ जग्मतुर्गृहान् |  ४   क
ततस्तौ वै शशापाथ त्रितो व्राह्मणसत्तमः ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति