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शान्ति पर्व
अध्याय ३५०
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नाग उवाच
शुक्रो नामासितः पादो यस्य वारिधरोऽम्वरे |  ४   क
तोय़ं सृजति वर्षासु किमाश्चर्यमतः परम् ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति