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शान्ति पर्व
अध्याय ३५३
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भीष्म उवाच
स चामन्त्र्योरगश्रेष्ठं व्राह्मणः कृतनिश्चय़ः |  १   क
दीक्षाकाङ्क्षी तदा राजंश्च्यवनं भार्गवं श्रितः ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति