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भीष्म पर्व
अध्याय १०४
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सञ्जय़ उवाच
केकय़ा भ्रातरः पञ्च धृष्टकेतुश्च वीर्यवान् |  ९   क
जघनं पालय़ामास पाण्डुसैन्यस्य भारत ||  ९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति