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आदि पर्व
अध्याय ३६
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सूत उवाच
यथा हि भगवान्रुद्रो विद्ध्वा यज्ञमृगं दिवि |  १२   क
अन्वगच्छद्धनुष्पाणिः पर्यन्वेषंस्ततस्ततः ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति