आदि पर्व  अध्याय ३६

सूत उवाच

दूरं चापहृतस्तेन मृगेण स महीपतिः |  १४   क
परिश्रान्तः पिपासार्त आससाद मुनिं वने ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति