शान्ति पर्व  अध्याय ३२५

भीष्म उवाच

भूत्वैकाग्रमना विप्र ऊर्ध्ववाहुर्महामुनिः |  ३   क
स्तोत्रं जगौ स विश्वाय़ निर्गुणाय़ महात्मने ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति