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शान्ति पर्व
अध्याय ५४
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भीष्म उवाच
स्वय़ं किमर्थं तु भवाञ्श्रेय़ो न प्राह पाण्डवम् |  २४   क
किं ते विवक्षितं चात्र तदाशु वद माधव ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति