आश्रमवासिक पर्व  अध्याय ३६

जनमेजय़ उवाच

किमाहाराश्च ते तत्र ससैन्या न्यवसन्प्रभो |  ५   क
सान्तःपुरा महात्मान इति तद्व्रूहि मेऽनघ ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति