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सभा पर्व
अध्याय ३६
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वैशम्पाय़न उवाच
सर्वेषां वलिनां मूर्ध्नि मय़ेदं निहितं पदम् |  ३   क
एवमुक्ते मय़ा सम्यगुत्तरं प्रव्रवीतु सः ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति