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विराट पर्व
अध्याय ३६
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अर्जुन उवाच
अहमप्यत्र सैरन्ध्र्या स्तुतः सारथ्यकर्मणि |  २२   क
न हि शक्ष्याम्यनिर्जित्य गाः प्रय़ातुं पुरं प्रति ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति