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विराट पर्व
अध्याय ३६
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वैशम्पाय़न उवाच
सत्रेण नूनं छन्नं हि चरन्तं पार्थमर्जुनम् |  ३४   क
उत्तरः सारथिं कृत्वा निर्यातो नगराद्वहिः ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति