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शल्य पर्व
अध्याय ३६
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वैशम्पाय़न उवाच
तत्र दत्त्वा हलधरो विप्रेभ्यो विविधं वसु |  १२   क
अजाविकं गोखरोष्ट्रं सुवर्णं रजतं तथा ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति