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शल्य पर्व
अध्याय ३६
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वैशम्पाय़न उवाच
यत्र गर्गेण वृद्धेन तपसा भावितात्मना |  १५   क
कालज्ञानगतिश्चैव ज्योतिषां च व्यतिक्रमः ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति