menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शल्य पर्व
अध्याय ३६
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
यस्मात्सा भरतश्रेष्ठ द्वेषान्नष्टा सरस्वती |  २   क
तस्मात्तदृषय़ो नित्यं प्राहुर्विनशनेति ह ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति