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शल्य पर्व
अध्याय ३६
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वैशम्पाय़न उवाच
यत्र देवाः समागम्य वासुकिं पन्नगोत्तमम् |  ३१   क
सर्वपन्नगराजानमभ्यषिञ्चन्यथाविधि |  ३१   ख
पन्नगेभ्यो भय़ं तत्र विद्यते न स्म कौरव ||  ३१   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति