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शल्य पर्व
अध्याय ३६
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः पश्चात्समापेतुरृषय़ः सत्रय़ाजिनः |  ४८   क
तेऽवकाशं न ददृशुः कुरुक्षेत्रे महाव्रताः ||  ४८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति