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उद्योग पर्व
अध्याय ४७
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सञ्जय़ उवाच
तथोग्रसेनस्य सुतं प्रदुष्टं; वृष्ण्यन्धकानां मध्यगां तपन्तम् |  ७२   क
अपातय़द्वलदेवद्वितीय़ो; हत्वा ददौ चोग्रसेनाय़ राज्यम् ||  ७२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति