वन पर्व  अध्याय १८

वासुदेव उवाच

स शाल्ववाणै राजेन्द्र विद्धो रुक्मिणिनन्दनः |  १६   क
मुमोच वाणं त्वरितो मर्मभेदिनमाहवे ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति