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शल्य पर्व
अध्याय ३६
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वैशम्पाय़न उवाच
एवं स कुञ्जो राजेन्द्र नैमिषेय़ इति स्मृतः |  ५४   क
कुरुक्षेत्रे कुरुश्रेष्ठ कुरुष्व महतीः क्रिय़ाः ||  ५४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति